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बाल विकास को प्रभावित करने वाले कारक
- वंश परम्परा
- वातावरण
- परिपक्वता
- शिक्षण
- आर्थिक स्थिति
- पोषण आहार
- वंश परम्परा - जिस वंश के माता पिता या पूर्वज बुद्धिमान होते हैं उस वंश के बच्चे भी कुशाग्र बुद्धि के होते हैं। मंद बुद्धि माता पिता की संतान भी प्रायः मंद बुद्धि के होते हैं। माता पिता दिव्यांग होने पर संतान के दिव्यांग होने की संभावना अधिक होती है। माता पिता की ऊंचाई लंबाई और मोटाई के लक्षण संतान पर स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ते हैं।
- वातावरण- यदि बालक सभ्य समाज में पला बढ़ा हो तो उसका आचरण सभ्य की तरह होता है। जो उसके व्यवहार से स्पष्ट दिखाई पड़ता है।
- परिपक्वता- बालक का जन्म समय पूर्व होने से उसके शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास पर प्रभाव पड़ता है।
- शिक्षण- बालक की शिक्षा संसाधन युक्त स्थान पर हो तो इससे उसके बौद्धिक और मानसिक विकास अल्प संसाधन युक्त स्थान की अपेक्षा अधिक होता है।
- आर्थिक स्थिति- सम्पन्न घर के बच्चे का हर आवश्यकता की पूर्ति होती है, जबकि कम सम्पन्न परिवार के बच्चे असुविधाओं में बढ़ते हैं।
- पोषण आहार- यदि बालक को पोषक तत्व युक्त भोजन न मिले तो इससे उसका शारीरिक बौद्धिक और मानसिक विकास प्रभावित होता है।

